तेरे ख्यालों की खुशबू में, हर सुबह नई रोशनी मिलती है। जैसे तन्हाई में चाँदनी, तेरे बिना सारी रात सुनसान लगती है।
शाम की चादर में छिपे हैं कुछ ख्वाब, तेरे बिना ये लम्हे, लगते हैं अंधेरे सब यार। तेरे साथ बिताए पल, यादों में हैं महके, अच्छा है ये शाम, जब तू हो पास मेरे, बार-बार।
तेरा जाना इस तरह, जैसे कोई साया चला गया, हर सुबह की किरण में, तेरा एक अंश खो गया। सपनों की गलियों में, अब तन्हाई बसी है, तेरे बिना ये दिल, हर पल बस तड़पता रहा।
जब भी ग़मों का साया आये, तुम्हारी यादों की धूप में, हर दर्द का बादल छट जाये।
तेरी यादों के साए में, खामोशी का आलम है, हर एक लम्हा तुझसे बात करता, ये दिल भी बेकरार है। तेरे जाने के बाद, हर खुशी की सुबह वीरान है, बस तेरे बिना, ये दिल का हर कोना उदास है।
जब खुद की पहचान बन गई, तो अब किसी की परवाह नहीं। अहंकार नहीं, सिर्फ आत्म-विश्वास है, ज़िंदगी में अब किसी की जरूरत नहीं।
खुली आँखों में बसी थी एक हसीन याद, वो पल अब धुंधले, जैसे बारिश में बिछी चादर, तू थी तो सब था, अब तन्हाई का है साया, हर लम्हा तेरा एहसास, दिल को करता है बेकरार।
तेरे बिना ये खामोशियाँ, हर सुबह को शाम कर देती हैं। बस एक नज़र की तलाश है, जो मेरे दिल की धड़कन को पहचान ले।
तेरे बिना ये दिल, हर पल उदास है, हर लम्हा तेरा ही इंतज़ार कर रहा है। चोट दिल की छुपाकर, मुस्कुराने का नाटक करूँ, क्योंकि तेरा नाम लेते ही, हर दर्द बिसर रहा है।
गहरी बातें, हंसी-मज़ाक में, दोस्ती के हर रंग, दिल के पास में। साथ जब तेरा होता है, हर ग़म भुला देते हैं, तेरे बिना ये ज़िंदगी, बस अधूरी सी लगती है।