शाम की बेला में बजे गाने, दिल में बसी हैं ये आज़ादी के अफसाने। हर ख्वाब में बुनते हैं हम, एक नया जहाँ, जहाँ न हो कोई रंग, बस हो अपना आसमान।
तेरे बिना इस दिल की धड़कनें, जैसे खामोश रास्तों पर, गुमसुम सी चलती हैं, बिना मंजिल के।
तेरे बिना ये सुबह भी सुनी सी लगती है, जितनी भी खुशियां हों, तेरी कमी खलती है। तेरा नाम लूँ जजबातों में, तो ख़ुद से मिलती है।
तेरे जाने के बाद, ये खामोशियाँ बोलने लगीं, हर एक सांस में, तेरे इश्क की खुशबू खोने लगीं। जिस रस्ते पर चल कर, हम कभी साथ थे, वहाँ अब सिर्फ यादें, मेरे साथ रोने लगीं।
जिंदगी का सफर आसान नहीं, ये समझ लो, हर किसी के लिए मुस्कान नहीं, ये समझ लो। जो पहचानता है मेरी खामोशी को, उसकी कीमत दूसरों से ज्यादा नहीं, ये समझ लो।
चाँदनी रात में तेरी यादें हैं बसी, हर लम्हा तेरे बिना अधूरी सी लगती है। इस शाम की ठंडी हवा में तेरा एहसास, दिल को छू जाए जैसे एक मीठी सी आवाज।
तेरे बिना ये ख्वाब अधूरा सा लगता है, सपनों में तेरा ही चेहरा सजा सा लगता है। हर परछाई में तेरी खुशबू बसी है, जिंदगी की राह पर, अब तेरा ही साया है।
तेरे बिना इस दिल की धड़कन अधूरी है, तेरी यादों का साया हर रोज़ मजबूर है। तू सामने हो तो हर लम्हा जिंदा होता है, तेरी हंसी में जैसे मेरा हर ख्वाब बसी है।
तेरे बिना हर सुबह जैसे, चाँद बिना रात की चाँदनी। तेरे साथ ही तो खिलते हैं, मेरे दिल के सारे अरमां।
खुद से की बातें अब तक याद हैं, तेरे जाने के बाद भी ये उदास शामें थोड़ी गहरी हैं। तेरे बिना ये संगीन लम्हें, बस एक ख्वाब बनकर रह गई हैं।