तेरी यादों की छाँव में, सूरज की किरणें भी मुझसे मुस्कुराती हैं। इस दोपहर की हल्की रौनक में, तेरे बिना ये लम्हें भी अधूरे लगते हैं।
इस दोपहर की धूप में, सपनों का साया ढूंढो। जो अधूरे रह गए थे कभी, उन ख्वाबों को फिर से जी लो।
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