
जब Wifi गया, दिल मेरा रोया, नेटफ्लिक्स का ख्वाब, फिर अधूरा हो गया। सोचते हैं अब, कैसे गुजरेगी रात, जुड़ने की कोशिश में, सिरफिरे हो गए।

दौड़ने लगे हैं सब, फ़िटनेस का है बुखार, पर चाय की एक चुस्की, सबको कर दे बेकार। पानी-पत्ते से ज़्यादा पसंद, बिस्किट-कुकीज़ की बात, खुद को टॉस करने से पहले, चाय की दीजिए सौगात।

रसोई में बर्तन की खड़खड़, जैसे मेरी बीवी की बातें कम नहीं होती। हर रोज़ नया वरदान सुनाए, पिछला जरा भी याद नहीं होती।

चाय की चुस्की में डूबे हैं ख्याल, तेरी यादों का आता है फिर एक हाल। कटे दिन तो कटे, पर रातों में ये ख्वाब, फिर से बनेगा कोई नया सवेरा, ये है मेरा इरादा कमाल।
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