
जब चलती है हवा, तो यादें भी झरती हैं, अजनबी से मिलकर, पर अपने से मिलती हैं। खुद को ढूंढते-ढूंढते, हम अक्सर खो जाते हैं, ज़िन्दगी की इस दौड़ में, कभी खुद से भी मिलते हैं।

हर एक मोड़ पर खुद को ढूंढना है, अजनबी नहीं, अब मुझे मुझसे मिलना है। दिल की सुनना, सच्चाई को समझना, ये ज़िंदगी नहीं, एक खूबसूरत सफर है।

सपनों की राह पर चल कर, जब मुसीबतें मिलती हैं, हर मोड़ पर उम्मीद की एक नयी किरन खिलती है। गहरी रातों में भी, जो हंसते हैं सच्चे दिल से, वो ही तो ज़िंदगी की रोशनी के पल जीते हैं।

हर मोड़ पर मिलती हैं कड़वाहटें, और उम्मीद की किरणें भी छिटकती हैं कहीं। गिनती हूँ पल, खुद से बातें करती, इस सफर में खोई, पर खुद को पाती हूं कहीं।
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