
तुम्हारे हंसने से बजी थी एक ख़ामोश जिन्दगी, जब तुम पास थी, फोन की घंटियाँ थीं बेकरार। अब हर रिंग में तुम ही हो, पर नहीं हो तुम कहीं, सुनो, ये ख़ामोशी भी है एक अजीब सा दोधारी प्यार।

चाय की खुशबू में खो गया हूँ, तेरे ख्वाबों की चाशनी में डूबा हूँ। बातों की मिठास से भरे ये लम्हे, कभी तो मिल, दिल से दिल को जोड़ दूँ।

तेरे बिना अधूरी है ये शाम, जैसे चाय में बिना चीनी का एक पैगाम। हर जज़्बात में तेरा ही नाम, कभी तेरा साथ, कभी तेरा आराम।

तेरे बिना जीना मुश्किल है, पर ये बात सबको बताई नहीं जा सकती। खुशियों में तेरी यादों का साया है, लेकिन मुस्कराहट की वजह भुलाई नहीं जा सकती। दोस्ती की बातें हों या मोहब्बत की, हर लम्हा तेरा अहसास छुपाई नहीं जा सकती।
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