
तेरी आँखों में छुपा है, ऐसा एक राज़ भी, जैसे पत्तों की सरसराहट में, छुपा मौसम का साज़ भी। बातें होती हैं कुछ ऐसी, जहाँ दिल की होती है ख़बर, खामोशियों में बसी है, एक नई लफ्ज़ों की जंग भी।

मुस्कुराहट में छुपा है एक राज़, तेरी आँखों में बसी है कहानी खास। हर शब्द में बसा है इक खेल, सुन ले ज़रा, ये हैं दो अर्थों के मेल।

तेरे इश्क़ की मिठास, जैसे चाय में चीनी, जितना चाहें, उतना मीठा, पर फिर भी एक कमी। हर लSip, हर चाशनी में, कुछ कडुवा सा सच छुपा, इश्क़ में ताजगी है, पर उसके साथ होता है टकरा।

तुम्हारी हंसी में छिपा है मेरा शोर, जब तुम पास होती हो, सब कुछ लगता है और। तुम्हारी आँखों की गहराई में क्या है, पता नहीं, पर जब दूर जाती हो, दिल की धड़कन हो जाती है चोर।
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