
हम चुप रह कर भी ख़ुद की पहचान रखते हैं, जो बातें दिल की हैं, वो ज़ुबां पर भी लाते हैं। दूसरों की सोच से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता, अपने नज़ाकत में ही, हम खुद को खिलाते हैं।

ज़िंदगी के सफर में, मैं मुस्कुराता हूँ, जो मुझे पसंद नहीं, उनसे कभी ना डरता हूँ। आत्मविश्वास की चादर ओढ़ कर, हर मुश्किल का सामना खुद से करता हूँ।

ताकत से नहीं, मेरे एटीट्यूड से पहचानते हैं, जब भी मिलता हूँ, कभी छाया बनके, कभी साया बनके। चुप रहूँ तो भी मेरे हौंसले की गूंज सुनाई देती है, क्योंकि मैं वो तारा हूँ, जो खुद से ही रोशनी बिखेरता है।

जिन्हें मेरा अंदाज़ नहीं पसंद, उन्हें मेरा नज़ारा नहीं चाहिए, मैं खुद को बदलूँ, ये ना हो सकता, मेरी पहचान, मेरी शान है।
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