
तुम्हारे बिना जीने की कोशिश की, हर बार खुद को पहले से भी बेकार पाया। जब शख़्स नहीं है पास, तो खुद से ही मोहब्बत करना सिख गया।

तेरे बिना इस दिल की धड़कनें, जैसे खामोश रास्तों पर, गुमसुम सी चलती हैं, बिना मंजिल के।

तेरे जाने के बाद, ये खामोशियाँ बोलने लगीं, हर एक सांस में, तेरे इश्क की खुशबू खोने लगीं। जिस रस्ते पर चल कर, हम कभी साथ थे, वहाँ अब सिर्फ यादें, मेरे साथ रोने लगीं।

तन्हाई में तेरी यादें बसी हैं, हर एक सांस में तेरा नाम लिखा है। खुद से भी करूं बात, तो दर्द बढ़ता है, जुदाई की इस रात में, बस खामोशी की आवाज़ है।
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