कभी-कभी खुद से मिलना भी ज़रूरी है, भीड़ में इंसान खुद को खो देता है।
हर मुश्किल एक सबक सिखा जाती है, बस समझने वाला नज़रिया चाहिए।
सन्नाटा भी कभी-कभी बहुत कुछ कह जाता है, सुनने का हुनर सबके पास नहीं होता।
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