
तूने देखा है कभी, खुद को ख्वाबों में? जिन्हें बस पाना नहीं, जीना है खुदा के साथ। हर एक साया तेरा, हर पल में बसा है।

तुम्हारी खामोशियों में छुपा है, मेरे दिल का हर एक राज़। जब भी तुम पास होती हो, सिर्फ तेरा अहसास ही काफी है।

जिन्हें हम समझ न सके, वो ख्वाब थे, हर सुबह की रोशनी में, वो आँखों का पानी थे। खुद से जुड़ने की तलाश में निकले हैं हम, कभी वो थे, कभी ये हैं, बस यादों की कहानी है।

तेरे बिना अधूरी है शामों की रोशनी, तेरे बिना खाली है ये दिल की हर धड़कन। जब से पाया है तुझे, खो दिया मैंने ख़ुद को, अब तो बस तेरा ही इंतज़ार है, ये दिल की कसरत।
Comments
Loading comments...