जब भी ढलती है शाम, तेरी यादों का बादल छाता है, हर एक लम्हा, तेरे बिना अधूरा सा लगता है। चाँदनी में तेरा नाम लूँ, हर ख्वाब में तेरा साया हो, इस गुनगुनाती शाम में, तेरा इंतज़ार हर साया हो।
जब शाम की चाय उबलती है, तब यादों की खुशबू महकती है। तुम्हारे बिना ये पल अधूरे हैं, जैसे चाँद बिना रातों के सूनें हैं।
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