1 Shayari
ज़िंदगी की उलझनों में जब थकावट बढ़ जाती है, तेरे पास आकर हर शिकायत कहीं ठहर जाती है। यही तो बड़ों वाला इश्क़ है ऐ मेरे हमनवा, जहाँ तेरी ज़रा सी मौजूदगी से तबीयत संवर जाती है।