1 Shayari
जिन राहों पर चलकर, हम सब कुछ खो बैठे, खुद से मिले नहीं, पर सबको समझा बैठे। क्या करें इस ग़म का, जो दिल में छुपा है, ज़िंदगी की किताब में, एक अधूरा सा फसाना सा है।