1 Shayari
काँच की खिड़की पर ढलती शाम और चाय का कप, तेरी उंगलियों की छुअन में सिमटती मेरी हर धड़कन। ज़माने से छुपकर जब तू मुझे यूँ देखती है, उसी एक इशारे पर ठहर जाता है मेरा सारा ज़हन।