कभी संडे की रातों में लेट-नाईट पार्टी के अरमान हुआ करते थे, दोस्तों के साथ देर तक शहर घूमने के सामान हुआ करते थे। अब तो हफ़्ते की सबसे बड़ी जीत यही लगती है गालिब, जब डी-मार्ट से बिना बहस के राशन का पूरा सामान आ जाता है।

तेरे बिना ये रातें अधूरी हैं, सपनों में भी तेरी यादें होती हैं। खामोशियों में तेरी हंसी बसी है, इश्क़ की परछाई, अब तो हर जगा है।

तेरे बिना ये दिल मुझसे बात करता है, हर खामोशी में तेरा नाम रहता है। तू है मेरा ख्वाब, मेरी जन्नत का साया, तेरे ख्यालों में हर रात बिताता है।

किसी और की बाहों में खोने की चाहत, पर खुद से जुदा होने का डर ज़्यादा है। तेरे बिना, ये अधूरी सी कहानी, जिंदगी के हर मोड़ पे तेरा ही साया है।
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