1 Shayari
तेरे बिना ख़ामोश हैं ये कमरे, सपनों में भी अब तेरा अक्स नहीं, ज़िंदगी की हर लहर में बसा है दर्द, लेकिन तुझसे कहने का कोई मौसम नहीं।